Natural justice नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन महागठबंधन
चुनावो के पहले होने वाले इस तरह के गठबंधन से [ Natural Justice ] नैसर्गिक न्याय प्रभावित होता

जब हम चुनाव का हिस्सा बनने जा रहे है तो क्या हमे सभी को बराबर का मौका नहीं देना चाहिए |
क्या इस तरह चुनाव से पहले होने वाले गठबंधन नेचुरल जस्टिस का उल्लंघन नहीं है ?
आप जीतने के बाद किसी का भी सपोर्ट करिये मगर चुनाव से पहले अगर सभी बड़े दल एक हो जायेंगे तो उन छोटे दलों का और निर्दलीय प्रत्याशी का क्या होगा क्या यह उसके साथ नैसर्गिक न्याय है |
हम फिर से एक बार लोकतंत्र के इस माह पर्व का हिस्सा बनने जा रहे है यह पर्व है जनता के न्याय जिसमे सभी अपना अपना रिपोर्ट कार्ड लिए बैठे है।
कुछ लोग अपनी राजनैतिक पारी खेल चुके है कुछ इस बार शुरू करने जा रहे है मगर मैं आपको ये सब बाते क्यो बता रहा हूँ।
Natural justice की बात हम सभी करते है क्या उस निर्दलीय प्रत्याशी को नेचुरल जस्टिस प्राप्त हो रहा है।
क्यो की जरूरत है इस वक्त आप जिस चश्मे से इस पर्व के सफल होने को देख रहे वही कुछ लोग ऐसे है जिनके साथ अन्याय भी हो रहा है।
मैं बात करूंगा महागठबंधन की इसको बनाने वालों की मंशा की बात नही है ये इससे होने वाले अन्याय की बात है।
जैसा हम सभी जानते है भारत मे जनप्रतिनिधि प्रणाली है जिसको पहले पार्टी सिस्टम ने अपने कब्जे में ले लिया लोग अपनी अपनी विचारधाराओं की पार्टी बना के चले आये जो अपने अपने उम्मीदवार उतरेगी मगर जनता का क्या वो तो जानती भी नही की उनका नेता कौन है कहा से पढ़ा है कितना पढ़ा है कैसा है वो बस पार्टी के नाम पर वोट करती है वही एक निर्दलीय प्रत्याशी जो हो सकता है पार्टी के उम्मीदवार से ज्यादा काबिलियत रखता है मगर उसके पास फण्ड नही इतना कि किसी पार्टी से लड़ सके और तो और उसके पास कोई स्टार प्रचारक भी नही होता।
ऊपर से इस बार बना महागठबंधन जिसमे कई पार्टियां मिल कर उम्मीदवार उतरेंगी सभी बड़े बड़े नेता उनका प्रचार करेंगे एक लंबी चौड़ी स्टार प्रचारकों की लिस्ट होगी क्या यह लोकतंत्र के लिए सही है ।
और फिर पार्टीयो का अस्तित्व ही क्या वो रजिस्टर्ड ही क्यों हुई उनका स्वयं का अस्तिव क्या ?
क्या उनको ख़त्म नही कर दिया जाना चाहिए ? या वे सभी बड़े दल मिल के एक नया दल बनाये |
ये लोकतंत्र का पर्व है जनता के प्रतिनिधित्व की बात है या कोई खीर है जो आधी आधी बांट ली।
आप चुनाव जीतने के बाद एक दूसरे को समर्थन कर सकते है परन्तु क्या चुनाव के पहले की ये गुटबाज़ी सही है उस निर्दलीय प्रत्याशी के साथ न्याय है।
Natural justice की बात हम सभी करते है क्या उस निर्दलीय प्रत्याशी को नेचुरल जस्टिस प्राप्त हो रहा है।
क्या चुनाव आयोग को इस तरह के गठबंधन पे सरकारों को कोई नीतिगत सुझाव नही देना चाहिए था।
मैं किसी के विरोध में नही हूँ बस न्याय के पक्ष में हूँ जिससे नए प्रतिनिधियों खासतौर पे जो निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले है उनके साथ अन्याय ना हो और चुनाव एक नैसर्गिक आधार पर हो जहाँ सभी को बराबर का मौका मिले।
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Natural justice नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन महागठबंधन
Reviewed by GAURAV SINGH
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April 12, 2019
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April 12, 2019
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Nice one
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